दिल्ली में हुए धमाकों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसके तार सीधे जम्मू-कश्मीर से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। इंटेलिजेंस एजेंसियों के अनुसार कश्मीर के व्हाइट कॉलर आतंकियों ने मिलकर इस हमले की साज़िश रची थी। असल योजना देश में बड़ी तबाही मचाने की थी, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों द्वारा मॉड्यूल के समय रहते भंडाफोड़ कर देने के कारण आतंकियों ने जल्दबाज़ी में धमाके को अंजाम दिया।
घटना के बाद घाटी में सुरक्षा एजेंसियों ने ताबड़तोड़ छापेमार कार्रवाई शुरू की। इन्हीं कार्रवाईयों में एक बड़ा खुलासा हुआ कि घाटी में इस समय 131 आतंकवादी सक्रिय हैं, जिनमें 122 विदेशी (पाकिस्तानी) आतंकी और केवल 9 स्थानीय हैं। ये आंकड़े नवंबर 2025 की नवीनतम इंटेलिजेंस रिपोर्ट में सामने आए हैं।
साल की शुरुआत की तुलना में यह संख्या बेहद चौंकाने वाली है। मार्च 2025 में पाकिस्तानी आतंकवादियों की संख्या 59 बताई गई थी, जो अब दोगुने से ज्यादा हो चुकी है। एजेंसियों के अनुसार यह बढ़ोतरी एलओसी के पार से आतंकियों की घुसपैठ कराने की लगातार कोशिशों का नतीजा है।
इस बीच सुरक्षा बल लगातार सक्रिय बने हुए हैं। वर्ष 2025 में अब तक 45 आतंकियों को विभिन्न मुठभेड़ों में ढेर किया जा चुका है, जो काउंटर-टेरर ऑपरेशन की तेज़ रफ़्तार को दर्शाता है। सेना के अनुसार LoC और इंटरनेशनल बॉर्डर पर कई घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम भी किया गया है।
उधर, दिल्ली ब्लास्ट केस में जांच एजेंसियों ने पुलवामा से एक इलेक्ट्रिशियन को हिरासत में लिया है। वहीं उरी में छापेमारी के दौरान AK-47 और भारी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी आतंकियों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन कश्मीर में उग्रवाद को जिंदा रखने के लिए अब स्थानीय भर्ती के बजाय बाहरी आतंकियों पर अधिक निर्भर हो रहे हैं।
कुल मिलाकर, दिल्ली धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों को एक बार फिर चौकन्ना कर दिया है और घाटी में आतंकवाद की बदलती रणनीति को लेकर नए सिरे से सतर्कता बढ़ गई है।


